भारत-EU व्यापार समझौता: 18 साल बाद खुला वैश्विक अवसर, आर्थिक शक्ति संतुलन में भारत की मजबूत एंट्री

करीब 18 वर्षों की लंबी कूटनीतिक बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। 27 जनवरी को सामने आया यह करार आने वाले समय में भारत-EU आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई देने वाला माना जा रहा है।

इस समझौते के तहत आयात-निर्यात शुल्क में राहत, व्यापारिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और निवेश सहयोग पर सहमति बनी है। इससे भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाज़ार में बेहतर पहुँच मिलेगी, वहीं छोटे-मझोले निर्यातकों और रोजगार सृजन को भी बल मिलने की उम्मीद है।

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विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता ऐसे दौर में हुआ है जब विश्व व्यापार नए साझेदारों और भरोसेमंद गठबंधनों की तलाश में है। इसी संदर्भ में अमेरिका की असहज प्रतिक्रिया को भी इसी बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, भारत-EU व्यापार समझौता केवल आर्थिक करार नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और बहुध्रुवीय दुनिया में उसकी मजबूत स्थिति का संकेत माना जा रहा है।

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