यूजीसी से होते हुए मामला मोदी सरकार की साख तक जा पहुँचा

(संजय द्विवेदी)

वो बाते जिस पर भाजपा ठीक से सफाई नहीं दें पायी

एक तो ये कि यूजीसी के नए नियम को मोदी सरकार का बिल बताकर प्रचारित किया गया। दूसरी बात ये कि जो सर्वोच्च अदालत यूजीसी के नियम पर रोक लगाकर वाहवाही लूट रहा है, उसी की टिप्पणी के बाद ही इस तरह के नियम बनाने की कवायद शुरू हुई थी।

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दरअसल #UGC ने फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों और रोहित वेमुला व पायल तड़वी के परिवारों की मांगों के बाद इक्विटी रेगुलेशन का ड्राफ्ट जारी किया था, दिसंबर 2025 में संसदीय समिति ने ड्राफ्ट की समीक्षा कर सर्वसम्मति से रिपोर्ट दी। इस संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह हैं, कुल 30 सदस्य हैं, जिसमें भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, सपा के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत)- 1, एनसीपी (शरद)-1 और आप की 1 पूर्व सदस्य हैं।

संबित पात्रा, रविशंकर प्रसाद, करण भूषण सिंह जैसे भाजपा के नेता इसके सदस्य हैं। अब जब रायता फैल गया है तो अपने-अपने हिसाब से सब पल्ला झाड़ ले रहे हैं और बयानबाजी कर रहे हैं। नतीजा यह है कि भाजपा के ही कोर वोटर उसे खरी-खोटी सुना रहे हैं, निशाने पर PM नरेंद्र मोदी तक आ गए हैं।

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