ग्वालियर हाईकोर्ट का सख़्त रुख: एडवोकेट अनिल मिश्रा को राहत, पुलिस कार्यवाही पर गंभीर सवाल

ग्वालियर | 07 जनवरी 2026

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता एवं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए उन्हें तत्काल जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने पुलिस की कार्यवाही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हिरासत के दौरान कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं का समुचित पालन नहीं किया गया।

जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस आशीष श्रोती की युगल पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक की स्वतंत्रता से जुड़ा मामला अत्यंत संवेदनशील होता है और इसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि अनिल मिश्रा को हिरासत में लेते समय गिरफ्तारी के कारणों की विधिवत जानकारी नहीं दी गई, साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य प्रकरण में तय दिशा-निर्देशों का पालन किया गया या नहीं। अदालत ने इसे नागरिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

क्या है मामला

यह प्रकरण 31 दिसंबर 2025 की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर के पोस्टर से जुड़े विवाद और कथित नारेबाजी के आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में SC/ST एक्ट सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर 2 जनवरी 2026 को अनिल मिश्रा को जेल भेज दिया था।

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई

अनिल मिश्रा की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर हाईकोर्ट में विशेष सुनवाई हुई। अदालत ने पुलिस से हिरासत की वैधता पर स्पष्ट जवाब मांगा, लेकिन संतोषजनक तथ्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद कोर्ट ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान जमानत राशि पर रिहा करने के आदेश दिए।

विधि जगत में प्रतिक्रिया

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद ग्वालियर सहित प्रदेश के अधिवक्ता समुदाय में संतोष और राहत का माहौल है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह आदेश कानून के राज और नागरिक स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है।

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