भोपाल।
मध्य प्रदेश में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के हालिया सरकारी सर्वे के अनुसार राज्य के 55 में से 39 जिलों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक पाई गई है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से भूजल की गुणवत्ता के बिगड़ने की ओर इशारा करती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नाइट्रेट प्रदूषण के मामलों में मध्य प्रदेश देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है। इसका सीधा असर उन इलाकों पर पड़ रहा है जहां आज भी लोग हैंडपंप और बोरवेल के पानी पर निर्भर हैं।
⚠️ स्वास्थ्य के लिए क्यों खतरनाक है नाइट्रेट?
विशेषज्ञों के अनुसार, पीने के पानी में नाइट्रेट की अधिक मात्रा नवजात शिशुओं में “ब्लू बेबी सिंड्रोम”, पेट से जुड़ी बीमारियों और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए यह जोखिम और अधिक माना जाता है।
🔍 नाइट्रेट बढ़ने के प्रमुख कारण
सरकारी रिपोर्ट में नाइट्रेट प्रदूषण के पीछे ये मुख्य वजहें बताई गई हैं—
• कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग
• सीवरेज और नालियों की खराब व्यवस्था
• बिना उपचार घरेलू व औद्योगिक अपशिष्ट का भूजल में मिलना
• जल संरक्षण और पुनर्भरण (Recharge) की कमजोर व्यवस्था
🏥 प्रशासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में पीने के सुरक्षित पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन सकती है। यह रिपोर्ट राज्य और स्थानीय प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी मानी जा रही है।
📌 आगे क्या जरूरी है?
• प्रभावित क्षेत्रों में नियमित जल गुणवत्ता जांच
• सुरक्षित पेयजल के वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था
• उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर निगरानी
• ग्रामीण क्षेत्रों में जल गुणवत्ता को लेकर जागरूकता अभियान
मध्य प्रदेश में नाइट्रेट की बढ़ती मात्रा यह संकेत दे रही है कि समस्या पानी की कमी की नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता के बिगड़ने की है। यह विषय केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है।