एआईकेएमकेएस का संपन्न हुआ एक दिवसीय किसान महापंचायत

 

 

डॉ टीएन सिंह, मुजफ्फरपुर बिहार

 

मुजफ्फरपुर: अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के बैनर तले पारू प्रखंड के चतुरपटी चौड़ में उद्योग बनाने के नाम पर किसानों से जबरन उपजाऊ जमीन छिनने के खिलाफ एकदिवसीय किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ो किसानों ने भाग लिया।

सभा की अध्यक्षता किसान नेता रामनंदन राम ने किया। वहीं मंच संचालन बच्चा बाबू कुमार ने किया। सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के प्रांतीय सचिव कॉमरेड अशोक बैठा ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा उद्योग के नाम पर किसानों से जबरन उपजाऊ जमीन छीना जा रहा है।

जो केवल यहां के किसानों की जीविका का एक मात्र साधन है। इसके अलावा जिंदा रहने के लिए दूसरा कोई साधन भी नहीं है। यह सरकार तरह-तरह के किसान विरोधी कानून बनाकर उसकी विरासत को खत्म करने के एक साजिश चला रही है। केंद्र सरकार लगातार किसान और मजदूर विरोधी कानून ला रही है। जैसे किसानी कृषि को बर्बाद कर कॉर्पोरेट के हवाले करने, बीज विधायक कानून 2025, और राष्ट्रीय विपणन बाजार नीति, किसानों से जमीन छीनने के यह कानून है। कृषि,किसान और आम जनता से जुड़ा हुआ बिजली ऊर्जा जीवन का एक महत्वपूर्ण है।

आज के जीवन में ऊर्जा के बिना रहना मुश्किल है इस बिजली बिल 2025 कानून प्राइवेट कर निजी कंपनियों को मुनाफा कमाने के लिए और आम जनता से बिजली ऊर्जा से वंचित करने का यह कानून है। इसी तरह मनरेगा की कानून को और शक्ति प्रदान करने और 300 दिन काम देने की जगह ग्रामीण मजदूरों की रोजगार पर हमला करते हुए जी राम जी ग्रामीण मजदूरों के लिए कानून बनाया है। यह कानून में राज्य सरकार को बोझ दे दिया मजदूरी भुगतान करने को। जबकि पहले 90% राशि केंद्र सरकार देती थी और राज्य सरकार 10% अभी यह राशि 40% राज सरकार पर ठोक दिया। जबकि पहले से राज्य सरकार कर्ज में है और गरीब है। ऐसी हालत में जी राम जी कानून मजदूर विरोधी है इसी तरह श्रमिक कानून को खत्म करके मजदूरों को गुलाम बनाने वाले उद्योगपतियों को मुनाफा कवर आने वाले चार लेबर कोर्ट कानून बनाकर मजदूरों को उद्योगपतियों के गुलाम बनाने का कार्य किया है।उसके तमाम अधिकार को छीन लिया।

अभी नरेंद्र मोदी सरकार ने मुक्त व्यापार समझौता का साइन करके छोटे उद्योग और उत्पादन कृषि उत्पादन को नष्ट करके बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की खाद्य पदार्थ और औद्योगिक उत्पादन से बाजार भर देगा। किसानों से जमीन छीनकर उद्योग लगाने के नाम पर इस इलाका के चार गांव का जमीन जो दो फ़सली उत्पादन पैदावार जमीन है इसके खिलाफ आज सभा का आयोजन किया गया।

हर हाल में किसानों ने अपनी जमीन उद्योग के लिए नहीं देंगे। क्योंकि उसकी जीविका का एकमात्र साधन है। इस विरासत को बचाने के लिए सभी किसानों को एकजुट होकर इस कोऑपरेटिव सरकार के खिलाफ एक जुट होकर एक लंबी लड़ाई लड़ने की जरूरत है।

सभा को संबोधित करने वालों में अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के जिला सचिव कॉमरेड उदय चौधरी, किसान नेता त्रिभुवन राय, मोहम्मद नईम, रामेश्वर सिंह, रामविलास चौधरी मंजूर आलम आदि शामिल थे।

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