इंदौर |
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) से जुड़ी लंबित परीक्षाओं, परिणामों और नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का शांतिपूर्ण धरना इंदौर में जारी है। यह आंदोलन माननीय उच्च न्यायालय की अनुमति के तहत संचालित किया जा रहा है और पूरी तरह वैधानिक दायरे में है, इसके बावजूद सरकार और आयोग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल सामने न आना कई सवाल खड़े कर रहा है।
धरना इंदौर स्थित MPPSC कार्यालय क्षेत्र में चल रहा है, जहां छात्र अनुशासित तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रही नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) का कहना है कि छात्रों की मांगें स्पष्ट, व्यावहारिक और सीधे उनके भविष्य से जुड़ी हुई हैं, लेकिन लंबे समय से उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
छात्रों का आरोप है कि न्यायालय से अनुमति मिलने और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के बावजूद न तो राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि और न ही आयोग का कोई जिम्मेदार अधिकारी धरनास्थल पर पहुंचा है। इससे यह संदेश जा रहा है कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
धरने पर बैठे युवाओं का कहना है कि परिणामों में देरी, भर्ती प्रक्रियाओं में अनिश्चितता और पारदर्शिता की कमी ने उनका भविष्य अधर में डाल दिया है। वर्षों की मेहनत के बाद भी जब जवाब नहीं मिलता, तो आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
NEYU ने सरकार और आयोग से स्पष्ट शब्दों में अपील की है कि समय रहते संवाद स्थापित किया जाए और मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाए। संगठन का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यदि छात्रों की बात सुने बिना चुप्पी साध ली जाती है, तो यह संवेदनशील शासन की कसौटी पर सवाल खड़ा करता है।
धरनास्थल से यह भी संदेश दिया गया कि जो सत्ता छात्रों को लगातार अनसुना करती है, वह जवाबदेही से दूर जाती है। यदि जल्द समाधान की दिशा में पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जा सकता है।