NH Desk, New Delhi
आजमगढ़ की पौराणिक तमसा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर जिले में किए गए प्रयासों को उस समय राष्ट्रीय पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में इस अभियान का विशेष उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि तमसा नदी केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है और इसके संरक्षण के लिए आजमगढ़ में जो जनभागीदारी आधारित पहल की गई, वह पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है।
तत्कालीन जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के नेतृत्व में तमसा नदी संरक्षण को एक प्रशासनिक योजना से आगे बढ़ाकर जन आंदोलन का रूप दिया गया। नदी तटों की व्यापक सफाई, वर्षों पुराने अतिक्रमण हटाने, गाद निष्कासन, नियमित श्रमदान, वृक्षारोपण और नदी में गिरने वाले नालों की निगरानी जैसे ठोस कदम उठाए गए। स्कूल-कॉलेज के छात्रों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और ग्राम पंचायतों को जोड़कर लोगों में नदी के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की गई।
इन सतत प्रयासों का परिणाम यह रहा कि तमसा नदी का प्राकृतिक स्वरूप धीरे-धीरे लौटने लगा और जल की गुणवत्ता में सुधार देखा गया। मन की बात में प्रधानमंत्री द्वारा रविंद्र कुमार के प्रयासों की सराहना के बाद यह अभियान देशभर में चर्चा का विषय बना और यह संदेश गया कि मजबूत इच्छाशक्ति और जनसहयोग से नदियों को फिर से जीवन दिया जा सकता है। आजमगढ़ की यह पहल प्रशासनिक संवेदनशीलता और सामाजिक सहभागिता की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी।

जनसंवेदनशील प्रशासन का चेहरा : डीएम रविंद्र कुमार
आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने अपने कार्यकाल में प्रशासन को केवल नियंत्रणकारी तंत्र नहीं, बल्कि समाज के साथ चलने वाली संस्था के रूप में स्थापित किया। उनकी कार्यशैली का केंद्र बिंदु जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही रहा। जनसुनवाई को औपचारिकता न मानकर उन्होंने इसे आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनाया, जिससे प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की दूरी कम हुई।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में डीएम रविंद्र कुमार का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उनके नेतृत्व में तमसा नदी संरक्षण अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा गया। अतिक्रमण हटाने, नदी की सफाई, गाद निष्कासन, नालों की निगरानी, वृक्षारोपण और श्रमदान जैसे प्रयासों ने नदी के पुनर्जीवन की दिशा में ठोस परिणाम दिए। इस पहल की गूंज राष्ट्रीय स्तर तक पहुँची, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में इसका उल्लेख कर आजमगढ़ के प्रयासों की सराहना की।
सामाजिक सरोकारों के प्रति डीएम रविंद्र कुमार की संवेदनशीलता उनके निर्णयों में स्पष्ट दिखाई दी। महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए उन्होंने विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया। सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने, स्वच्छता अभियानों की नियमित निगरानी और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों को गति देने जैसे प्रयासों से सामाजिक ढांचे को सशक्त बनाने का कार्य किया गया।
विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना भी उनके प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा। लंबित योजनाओं की समीक्षा, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाकर कई परियोजनाओं को धरातल पर उतारा गया। कानून-व्यवस्था के मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्होंने सख्ती और संवेदनशीलता के बीच तालमेल बनाए रखा।
कुल मिलाकर, डीएम रविंद्र कुमार का प्रशासनिक सफर यह संदेश देता है कि जब नेतृत्व दूरदर्शी, संवेदनशील और जनसरोकारों से जुड़ा हो, तो प्रशासन समाज में सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम बन सकता है। आजमगढ़ में उनके प्रयास एक ऐसी मिसाल के रूप में उभरे हैं, जो अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायी है।