प्रयागराज। माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहे विवाद में भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के दो ट्वीट चर्चा का विषय बन गए हैं। पहले ट्वीट में उन्होंने प्रयागराज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शंकराचार्य होने का सबूत मांगे जाने को मर्यादा का उल्लंघन बताया, वहीं विवाद बढ़ने पर उन्होंने दूसरा ट्वीट कर अपना रुख स्पष्ट किया।
उमा भारती ने कहा कि किसी संत से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से बाहर है। यह अधिकार केवल शंकराचार्य परंपरा और विद्वत परिषद को है, न कि सरकार या प्रशासन को। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए धार्मिक परंपराओं के सम्मान की अपील की।
उमा भारती के बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्ष ने इसे भाजपा के भीतर मतभेद के रूप में पेश किया, जबकि सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
विवाद बढ़ने पर उमा भारती ने दूसरा ट्वीट कर स्पष्ट किया कि उनका बयान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि योगी विरोधी किसी भी तरह की खुशफहमी न पाली जाए। हालांकि, उन्होंने अपने मूल तर्क पर कायम रहते हुए दोहराया कि प्रशासन द्वारा शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा जाना धार्मिक मर्यादा के खिलाफ है।
अधिकारियों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
इस पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश में अधिकारियों के इस्तीफों का दौर भी चर्चा में है। बीते दिनों प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के धरने और यूजीसी नियमों को लेकर बरेली से सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया था।
अब इसी कड़ी में जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दो पन्नों का इस्तीफा राज्यपाल को भेजते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में यह कदम उठा रहे हैं।
प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई अभद्र टिप्पणी से वह गहरे आहत हुए हैं। उन्होंने कहा, “जिस प्रदेश का नमक खाता हूं और जिससे वेतन मिलता है, उसके मुख्यमंत्री का अपमान मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।” उन्होंने इसे राज्य, संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ बताया।