ओटीपी आधारित डिलीवरी के साथ स्पीड पोस्ट अब अधिक सुरक्षित, -पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

डाक विभाग 1 अक्टूबर 2025 से स्पीड पोस्ट सेवा को उन्नत करेगा। डिजिटलीकरण के इस युग में रीयल-टाइम ट्रैकिंग और ओटीपी आधारित डिलीवरी के साथ, स्पीड पोस्ट पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, संरक्षित, स्मार्ट और नागरिक-अनुकूल बन रहा है। अब ‘रजिस्ट्रीकरण’ या ‘रजिस्ट्रीकृत डाक’ से प्रेषिती विनिर्दिष्ट डिलिवरी के लिए स्पीड पोस्ट डाक-वस्तु (दस्तावेज और पार्सल) हेतु  मूल्यवर्धित सेवा अभिप्रेत है। उत्तर गुजरात परिक्षेत्र, अहमदाबाद के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग ने इस बदलाव को अधिसूचित कर दिया है, जो 1 अक्टूबर से स्पीड पोस्ट के लिए संशोधित टैरिफ संरचना के साथ लागू होगा।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि नई प्रणाली के तहत, स्पीड पोस्ट दस्तावेज़ और पार्सल, कानूनी दस्तावेज़ों और वैधानिक संचार सहित सभी प्रकार की उत्तरदायी वस्तुओं की डिलीवरी के लिए एक मूलभूत सेवा के रूप में काम करेंगे। अब, बुकिंग के दौरान प्रेषक द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार स्पीड पोस्ट सेवा या तो पता-विशिष्ट होगी या प्राप्तकर्ता-विशिष्ट होगी। रजिस्ट्रेशन सुविधा केवल प्राप्तकर्ता-विशिष्ट डिलीवरी के लिए ₹05 प्रति वस्तु (जीएसटी अतिरिक्त) के पूरक मूल्य-वर्धित विकल्प के रूप में प्रदान की जाएगी। स्पीड पोस्ट वस्तुओं पर बीमा सुविधा हमेशा की तरह जारी रहेगी।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि 01 अक्टूबर 2025 से स्पीड पोस्ट दस्तावेज़ और पार्सल में मूल्य-वर्धित सेवा के रूप में ओटीपी आधारित डिलीवरी शुरू की जाएगी। ओटीपी आधारित डिलीवरी की सुविधा का लाभ उठाने के लिए ग्राहकों को बुकिंग के समय मूल्यवर्धन शुल्क के रूप में ₹05 (जीएसटी अतिरिक्त) का भुगतान करना होगा। यह डिजिटलीकरण के युग में एक बड़ी पहल है। डाक विभाग ने हाल ही में एपीटी 2.0 प्लेटफ़ॉर्म के तहत तकनीकी परिवर्तन किये जिसके कारण ओटीपी-आधारित डिलीवरी की उन्नत ग्राहक-केंद्रित सुविधा चालू होगी, जो क्लाउड-रेडी सिस्टम है। यह कदम लेखादेय डाक वितरण को सुव्यवस्थित करेगा, सेवाओं में ओवरलैप को कम करेगा और बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव सुनिश्चित करेगा।

इस युक्तिकरण के साथ, डाक विभाग ने 01 अक्टूबर 2025 से स्पीड पोस्ट दस्तावेजों के लिए शुल्क में भी संशोधन किया है। पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, नई दरें (जीएसटी को छोड़कर) पहले 50 ग्राम के लिए इंट्रा-सिटी डिलीवरी के लिए ₹19 और शेष भारत के लिए ₹47 होंगी। इसके बाद, दूरी और वजन के आधार पर, डाक विभाग द्वारा राजपत्रित अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित दर संरचना लागू होगी। हालाँकि, भारत के भीतर सबसे लंबे रूट डिलीवरी के साथ 500 ग्राम तक वजन वाले स्पीड पोस्ट दस्तावेज़ के लिए अधिकतम शुल्क ₹93 (जीएसटी अतिरिक्त) होगा। अद्यतन स्पीड पोस्ट दरें बाजार उन्मुख, पारदर्शी और जीएसटी से स्पष्ट रूप से अलग हैं। ई-कॉमर्स व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए, जो उपभोक्ता न्यूनतम ₹9 लाख का मासिक व्यवसाय प्रदान करते हैं तो उन सभी उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग राशि पर 10% से 50% तक की छूट उपलब्ध है।

गौरतलब है कि भारतीय डाक ने 1 अगस्त, 1986 को पत्रों और पार्सलों की समयबद्ध, कुशल और सुरक्षित डिलीवरी सेवा के रूप में अपनी स्पीड पोस्ट सेवा शुरू की थी। शुरुआत में “ईएमएस स्पीड पोस्ट” नाम से जानी जाने वाली यह सेवा, देश भर में तेज़ और अधिक विश्वसनीय डिलीवरी प्रदान करके निजी कूरियर कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने के भारतीय डाक के आधुनिकीकरण प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी।

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