सरकारी जमीनों से जुड़े मामलों में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब सरकारी भूमि से संबंधित मामलों में राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव का शपथ-पत्र (हलफनामा) अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई मामलों में कलेक्टर और राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निजी लाभ के मामले सामने आए हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल विभागीय हलफनामे अब पर्याप्त नहीं माने जाएंगे।
हाईकोर्ट के अनुसार, मुख्य सचिव के स्तर पर जवाबदेही तय होने से
• सरकारी जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी,
• न्यायालय को सही व जिम्मेदार पक्षकार से तथ्य प्राप्त होंगे,
• और प्रशासनिक उदासीनता पर अंकुश लगेगा।
अदालत ने यह भी साफ किया कि भविष्य में यदि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में तथ्य छिपाने या लापरवाही पाई गई, तो व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
क्यों अहम है यह आदेश
यह निर्देश राज्य के उन हजारों मामलों पर असर डालेगा, जहां सरकारी जमीनों को लेकर वर्षों से विवाद लंबित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर सीधा दबाव बनाएगा और जमीन माफिया पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।