चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) – चरण-2 में देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह कदम मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतित बनाने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।
सूची से सबसे ज्यादा नाम उत्तर प्रदेश में हटाए गए हैं, लगभग 2.89 करोड़, जबकि अन्य बड़े पैमाने पर हटाने की कार्रवाई महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी हुई। आयोग का कहना है कि हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अपात्र मतदाता शामिल हैं।
यह सूची अस्थायी (ड्राफ्ट) है और चुनाव आयोग ने प्रभावित मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया है। मतदाता ऑनलाइन या अपने नजदीकी मतदाता सहायता केंद्र में यह प्रक्रिया कर सकते हैं। आपत्तियों के निपटारे के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए अहम है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज होने की संभावना है। आयोग का प्रयास है कि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी भी मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो।
इस समीक्षा प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में लगातार सुधार और शुद्धिकरण कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद और दावे को कम किया जा सके।