ग्वालियर | 14 जनवरी 2026
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत ग्वालियर नगर निगम द्वारा किए गए आवास आवंटनों को लेकर सामने आई शिकायतों पर अब सख्त रुख अपनाया गया है। प्रदेश के जल संसाधन मंत्री एवं ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने पूरे मामले की विभागीय जांच कराने और आवंटित सभी आवासों का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय से दूरभाष पर चर्चा कर योजना की स्थिति की जानकारी ली और निर्देश दिए कि जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। यदि जांच में कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने जानकारी दी कि पीएम आवास योजना (शहरी) के एएचपी घटक के अंतर्गत मानपुर क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 2112 आवासों का निर्माण किया गया है। आवंटित आवासों की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए एक भौतिक सत्यापन समिति का गठन किया गया है, जिसने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है।
बुधवार को समिति द्वारा मानपुर के ई-1, ई-2 और ई-3 ब्लॉकों में स्थित 144 आवासों का भौतिक सत्यापन किया गया। इस दौरान हितग्राहियों की पहचान आधार कार्ड के माध्यम से की गई तथा यह भी जांचा गया कि आवंटित आवास में वास्तविक हितग्राही स्वयं निवास कर रहा है या नहीं। साथ ही, मौके पर निवासरत व्यक्तियों का निगम की आवंटन सूची से मिलान किया गया।
नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य शासन के निर्देशों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का कोई भी हितग्राही 10 वर्ष तक आवास का विक्रय, दान या हस्तांतरण नहीं कर सकता, न ही इस अवधि में दस्तावेजों में किसी प्रकार का नामांतरण किया जा सकता है। प्रत्येक चयनित हितग्राही का पंजीयन केंद्र शासन के पीएमएवाई पोर्टल पर अनिवार्य रूप से किया जाता है।
प्रभारी मंत्री के निर्देश पर शिकायतों की विस्तृत जांच प्रक्रिया जारी है, और आने वाले दिनों में शेष आवासों का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा।