आदित्य सिंह तबादला मामला: आनंदपुर ट्रस्ट ने रिश्वत के आरोपों को बताया निराधार, अफ़वाहों की साख पर सवाल

अशोकनगर के तत्कालीन कलेक्टर आदित्य सिंह के तबादले को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आनंदपुर ट्रस्ट ने रिश्वत से जुड़े सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ट्रस्ट का स्पष्ट कहना है कि न तो पूर्व कलेक्टर ने किसी प्रकार की धनराशि की मांग की और न ही ट्रस्ट की ओर से उनके खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई शिकायत की गई।

ट्रस्ट की ओर से शब्द सागर आनंद महात्मा द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि आदित्य सिंह से जुड़ी रिश्वत की खबरें पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन हैं। ट्रस्ट को यह भी ज्ञात नहीं है कि ऐसे आरोप किन आधारों पर और किस स्रोत से फैलाए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत किए जाने की चर्चाओं को भी ट्रस्ट ने असत्य बताया है।

उल्लेखनीय है कि बुधवार देर रात राज्य सरकार ने आदित्य सिंह को अशोकनगर कलेक्टर पद से हटाकर भोपाल में नई प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद कुछ माध्यमों और सोशल मीडिया पर इस तबादले को आनंदपुर धाम से जुड़े कथित तीन करोड़ रुपये की मांग से जोड़कर प्रचारित किया जाने लगा।

हालांकि, अब जब स्वयं संबंधित ट्रस्ट ने इन आरोपों का सार्वजनिक रूप से खंडन कर दिया है, तो तबादले को लेकर फैलाई गई चर्चाओं की विश्वसनीयता और मंशा दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

सम्मान की घोषणा और तबादले का संयोग

यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि जिस दिन तबादले का आदेश जारी हुआ, उसी दिन आदित्य सिंह को उनके प्रशासनिक कार्यों के लिए सम्मानित किए जाने की घोषणा भी सामने आई थी। दिनभर सम्मान की सूचना चर्चा में रही और रात में तबादले का आदेश जारी हो गया।

अब बहस आरोपों से अधिक अफ़वाहों पर

ट्रस्ट के खंडन के बाद पूरा मामला अब रिश्वत के आरोपों से अधिक अफ़वाहों और तथ्यों के अंतर को लेकर चर्चा में है। जब कथित शिकायतकर्ता पक्ष ही आरोपों से इनकार कर रहा है, तो तबादले को लेकर बनाई गई कहानियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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