एमपी में ‘डिजिटल जनगणना’ का काउंटडाउन: भोपाल में आज 55 कलेक्टरों की हाई-लेवल ड्रिल

भोपाल | शुक्रवार, 13 फरवरी 2026

मध्य प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी आज भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना की दिशा में अपनी बिसात बिछाने जा रही है। राजधानी भोपाल में आज प्रदेश के *55 जिलों के कलेक्टरों, 12 संभागायुक्तों और 16 नगर निगम आयुक्तों* की एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस आयोजित है। यह बैठक महज एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि 2027 की जनगणना के लिए राज्य के ‘डिजिटल वॉर-रूम’ का शंखनाद है।

*आज की बैठक का मुख्य एजेंडा*

मुख्यमंत्री आज इस हाई-लेवल मीटिंग में स्पष्ट संदेश देंगे कि जनगणना अब केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि भविष्य के विकास की सटीक दिशा तय करने वाली प्रक्रिया है। आज की ड्रिल का मुख्य फोकस *1 मई से 30 मई 2026* के बीच होने वाले ‘मकान सूचीकरण’ (House Listing) अभियान को तकनीकी धार देना है।

*कागज से क्लाउड तक का सफर*

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इस बार की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी।

* *रियल-टाइम एंट्री:* फील्ड से प्रगणक जो भी डेटा दर्ज करेंगे, वह सीधे डिजिटल क्लाउड पर ‘सिंक’ होगा।
* *सटीकता और जवाबदेही:* जीपीएस-टैग्ड टूल्स के जरिए हर एंट्री की लोकेशन ट्रैक होगी, जिससे फर्जी आंकड़ों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
* *कमान:* सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी करेंगे।

*विश्लेषण: क्या सिस्टम तैयार है?*

भोपाल की यह रणनीतिक बैठक संकेत दे रही है कि सरकार अब ‘अनुमान’ के बजाय ‘एविडेंस बेस्ड’ पॉलिसी मेकिंग की ओर बढ़ रही है। हालांकि, प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि क्या मई की तपती गर्मी में ग्रामीण इलाकों की डिजिटल कनेक्टिविटी और मैदानी अमले का तकनीकी कौशल इस महा-अभियान की गति को बरकरार रख पाएगा?

> आज की यह ‘वॉर-रूम ड्रिल’ तय करेगी कि 2027 की जनगणना की नींव कितनी मजबूत होगी। प्रशासन के लिए असली चुनौती ऐप चलाना नहीं, बल्कि उस डेटा की शुद्धता बनाए रखना है जिस पर प्रदेश का भविष्य निर्भर है।

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