नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026।
केंद्रीय बजट से ठीक पहले संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अहम संकेत दे दिए हैं। सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। यह अनुमान मजबूत घरेलू मांग, सेवाक्षेत्र की स्थिरता और आर्थिक सुधारों पर आधारित बताया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण में स्पष्ट किया गया है कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और निर्यात से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में लचीलापन बना हुआ है। सरकार का फोकस अब विकास के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक स्थिरता पर है।
महंगाई और राजकोषीय स्थिति पर राहत के संकेत
सर्वे में यह भी संकेत दिया गया है कि महंगाई दर नियंत्रण में रह सकती है और भारतीय रिज़र्व बैंक के तय दायरे के आसपास बनी रह सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना जताई गई है। वहीं राजकोषीय घाटे को चरणबद्ध तरीके से कम करने की रणनीति को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
रोजगार, टैक्सपेयर और सेक्टरल सुधार
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार देश में टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़कर करीब 9.2 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि का संकेत मानी जा रही है।
इसके साथ ही:
सेवाक्षेत्र और विनिर्माण में मजबूती
कृषि क्षेत्र में स्थिरता
बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार
डिजिटल और तकनीकी क्षेत्रों में अवसर
जैसे पहलुओं को भी सर्वे में रेखांकित किया गया है।
बजट 2026-27 की दिशा तय करेगा सर्वे
विशेषज्ञों के मुताबिक आर्थिक सर्वेक्षण सरकार के आगामी बजट के लिए एक रोडमैप का काम करता है। ऐसे में 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में विकास, रोजगार, निवेश और महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता दिए जाने की पूरी संभावना है।
कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 यह संकेत देता है कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी स्थिर और संतुलित विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।