गणतंत्र की चेतना, नारी-शक्ति और विकसित भारत का संकल्प

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम प्रेरक संबोधन

नई दिल्ली | 25 जनवरी 2026

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, संविधान की आत्मा और विकसित भारत के संकल्प को भावपूर्ण और दृढ़ शब्दों में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत का गणतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों की साझा जिम्मेदारी, चेतना और सहभागिता का जीवंत स्वरूप है।

राष्ट्रपति ने देश और विदेश में रह रहे सभी भारतवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक की यात्रा ने भारत को स्वाधीनता से संवैधानिक लोकतंत्र तक पहुंचाया। उसी दिन भारत ने न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के मूल्यों को अपनाकर विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।

संविधान और राष्ट्रीय एकता की शक्ति

राष्ट्रपति ने संविधान को राष्ट्र की आधारशिला बताते हुए कहा कि यह केवल कानूनों का संकलन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। उन्होंने लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता आज भी भारत की सबसे बड़ी ताकत है। ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने इसे राष्ट्र-प्रेम और सांस्कृतिक एकता का अमर प्रतीक बताया।

सेनाओं से लेकर श्रमिकों तक—गणतंत्र के सच्चे स्तंभ

राष्ट्रपति ने कहा कि सशस्त्र बलों की सतर्कता, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कर्तव्यनिष्ठा, किसानों का परिश्रम, श्रमिकों की मेहनत, शिक्षकों का मार्गदर्शन, स्वास्थ्यकर्मियों की सेवा और सफाई मित्रों का योगदान—इन सभी से भारत का गणतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि वे विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं।

लोकतंत्र और मतदाता की भूमिका

25 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मताधिकार का जागरूक उपयोग ही लोकतंत्र की सच्ची शक्ति है। उन्होंने महिलाओं की बढ़ती मतदान भागीदारी को भारतीय लोकतंत्र की एक सशक्त और सकारात्मक दिशा बताया।

नारी-शक्ति: विकसित भारत की आधारशिला

राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण विकसित भारत के निर्माण की कुंजी है।
उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, जन-धन योजना में महिलाओं की बहुलता, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों महिलाओं और खेल, विज्ञान, कृषि व रक्षा क्षेत्रों में बेटियों की उपलब्धियों का उल्लेख किया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को उन्होंने महिला नेतृत्व के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे समावेशी और समानता आधारित लोकतंत्र को नई ऊर्जा मिलेगी।

जनजातीय समाज और समावेशी विकास

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भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, जनजातीय गौरव दिवस, एकलव्य विद्यालय, सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन और PVTG समुदायों के लिए चल रही योजनाओं का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विकास तभी सार्थक है जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी उससे जुड़ सके।

किसान, गरीब कल्याण और युवा-शक्ति

राष्ट्रपति ने किसानों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनकी मेहनत से भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना है।
‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना’ और पक्के आवास जैसी योजनाओं को उन्होंने गरीबी उन्मूलन की ठोस मिसाल बताया।

युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए राष्ट्रपति ने ‘MY भारत’, स्टार्ट-अप संस्कृति और नवाचार को विकसित भारत की दिशा में निर्णायक बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा-शक्ति अग्रणी भूमिका निभाएगी।

आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भर भारत

भारत को विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। GST, श्रम सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और स्वदेशी सोच को उन्होंने आर्थिक परिवर्तन के मजबूत स्तंभ बताया।

संस्कृति, ज्ञान परंपरा और सुशासन

राष्ट्रपति ने भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग, ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ और भारतीय भाषाओं में संविधान की उपलब्धता को सांस्कृतिक आत्मगौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित सुशासन, Ease of Living और जनभागीदारी से सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत हुआ है।

राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और विश्व-शांति

राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता, सशस्त्र बलों की आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के लिए LiFE मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन भारतीय जीवन-दृष्टि का मूल है। उन्होंने विश्व-शांति के लिए भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया।

राष्ट्र प्रथम का आह्वान

अंत में राष्ट्रपति ने गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की पंक्तियों का स्मरण करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस राष्ट्र प्रथम की भावना को और दृढ़ करने का अवसर है। उन्होंने सभी देशवासियों के सुख, शांति, सुरक्षा और सौहार्दपूर्ण भविष्य की कामना के साथ संबोधन समाप्त किया।

जय हिन्द!
जय भारत!

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