नई दिल्ली | 07 जनवरी 2026
सुप्रीम कोर्ट में आज आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई का नया दौर शुरू हुआ। तीन जजों की बेंच ने स्पष्ट किया कि अदालत इस विषय पर कुत्तों के समर्थकों और विरोध करने वालों—दोनों पक्षों की दलीलों को सुनेगी, ताकि मानव सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाया जा सके।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इस मामले में इतनी अधिक याचिकाएँ दायर हो रही हैं कि यह स्तर कई मानवीय मामलों के बराबर पहुँच गया है। कई राज्यों द्वारा समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत न किए जाने पर अदालत ने नाराज़गी जताते हुए सभी राज्यों को Animal Birth Control (ABC) नियमों के पालन से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान प्रमुख बिंदु:
• पंजाब स्वास्थ्य विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में आवारा कुत्तों से सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
• पशु अधिकार संगठन PETA India ने अदालत से अपील की कि कुत्तों को पकड़कर कैद करने के बजाय वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से आबादी नियंत्रण पर ज़ोर दिया जाए।
• गुजरात हाई कोर्ट परिसर में भी आवारा कुत्तों की उपस्थिति को लेकर वकीलों ने चिंता व्यक्त की है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर आवारा कुत्तों का बढ़ता व्यवहार, बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा तथा पशु कल्याण—तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाशा जा रहा है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि इस विषय पर शीघ्र कोई संतुलित दिशा‑निर्देश सामने आ सकते हैं, हालांकि फिलहाल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया है।
पृष्ठभूमि:
सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि आवारा कुत्तों को बिना योजना के हटाने के बजाय नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर व्यवस्था के माध्यम से नियंत्रित किया जाए। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्थित तरीके से कुत्तों को भोजन कराने पर भी आपत्ति जताई गई है।
यह मामला सीधे तौर पर आम नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय जिम्मेदारी से जुड़ा है, जिस पर देश की सर्वोच्च अदालत गंभीरता से विचार कर रही है।