ग्वालियर | 15 जनवरी 2026
संक्रांति की सुबह ग्वालियर के आसमान में सिर्फ पतंगें नहीं उड़ीं, बल्कि उन पर सवार थीं दीदियों की उम्मीदें, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य के सपने। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने तिल-गुड़ की मिठास के साथ एक-दूसरे को अपनाया और अपनी अधूरी ख्वाहिशें, मजबूत इरादे और सकारात्मक सोच पतंगों पर लिखकर खुले आकाश को सौंप दीं।
मौका था राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा “नयी चेतना–हौसलों की उड़ान” अभियान के तहत धूमेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित पतंग उत्सव सह तिल-गुड़ बैठक का। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बदलती सोच और सशक्त होती महिलाओं की भावनात्मक अभिव्यक्ति बनकर सामने आया।
सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत ग्वालियर जिले में 13 से 15 जनवरी तक चले इस विशेष जेंडर अभियान का उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ योजनाओं से नहीं, बल्कि आत्मबल और आत्मसम्मान से जोड़ना रहा। इन दिनों के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक बराबरी जैसे मुद्दों पर संवाद हुआ, अनुभव साझा किए गए और भरोसे की डोर मजबूत की गई।
संक्रांति पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी नारायण राजे मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उन्होंने महिलाओं को अपने सपनों को सीमाओं में न बाँधने और आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया।
अभियान के अंतिम दिन 15 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जिले भर में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया।
जिला प्रबंधक श्री विनीत गुप्ता के अनुसार, शिविरों में दीदियों की ब्लड प्रेशर, एनीमिया और मधुमेह की जांच की गई। साथ ही उन्हें संतुलित भोजन, वजन नियंत्रण, माँ-शिशु टीकाकरण और सेनेटरी नेपकिन के उपयोग जैसी जरूरी बातों पर जागरूक किया गया—क्योंकि सशक्त महिला की पहली शर्त है स्वस्थ महिला।
उन्होंने बताया कि
• पहले दिन लखपति दीदी संवाद के माध्यम से आत्मनिर्भरता की कहानियाँ साझा हुईं,
• दूसरे दिन तिल-गुड़ और पतंगों के साथ भावनाओं ने उड़ान भरी,
• और अंतिम दिन स्वास्थ्य शिविरों ने महिलाओं की सेहत को प्राथमिकता दी।
“नयी चेतना–हौसलों की उड़ान” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि वह एहसास बना, जहाँ महिलाओं ने खुद को सुना, समझा और आगे बढ़ने का हौसला पाया।