आज देश पद्म विभूषण से सम्मानित मुलायम सिंह यादव का 84 वाँ जन्मदिन मना रहा है। मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 में सैफई, गांव जिला इटावा उत्तर प्रदेश में हुआ था । पारिवारिक पृष्ठभूमि से मुलायम सिंह किसान थे लेकिन यही से राजनीति के शिखर का रास्ता तय किया और किसानो एवं आम लोगों के प्रति अपने लगाव व प्रेम के कारण ही वह आम जनमानस के बीच “धरती पुत्र व नेताजी” के नाम से मशहूर हो गए । आज वह सशरीर हमारे बीच नहीं है फिर भी वह हम सभी के दिल और दिमाग में बसे हुए हैं जिसका कारण यह है कि उनका समाज के प्रति योगदान एवं उनके विचार उनका समाजवादी चिंतन व लोगों के प्रति संवेदना । आज देश व प्रदेश का हर गरीब, मजलूम, मेहनतकश वर्ग नेताजी का ऋणी है। उनके कार्य, विचार, भाषा- शैली तथा कठोर निर्णय लेने की क्षमताओं आदि का राजनीति में कोई उनका सानी नहीं है। आज हम नेताजी के उन कार्यों को याद करेंगे जिसकी वजह से वह “धरती पुत्र” व समाजवादी विचारधारा के मजबूत स्तंभ के रूप में याद किए जाते हैं।
नेताजी का बचपन से ही कुश्ती के प्रति अटूट लगाव था वे अक्सर स्कूल से घर आने के बाद कुश्ती के अखाड़े में दांव पेंच आजमाते पाए जाते थे, कुश्ती खेलते ही राजनीतिक सफर का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। चौधरी नत्थू सिंह ने मुलायम सिंह को अखाड़े में देखकर यह घोषणा की, कि उनका राजनीतिक विरासत मुलायम ही संभालेंगे। मुलायम सिंह ने जैन इंटर कॉलेज से कक्षा 12 (इण्टर मीडिएट) की परीक्षा पास किया । वहीं बतौर शिक्षक नियुक्त हुए और जब शिक्षक की भूमिका में रहे तब से लेकर राजनीति में आने तक का सफर बेमिसाल रहा ।
वर्ष 1977 में जब प्रदेश में रामनरेश यादव सरकार बनी तब नेता जी को सरकार में सहकारिता पशुपालन एवं ग्रामीण उद्योग विभाग के मंत्री बनाया गया। उन्होंने रोजगार प्रदान करने हेतु सहकारिता क्षेत्र में 5500 लघु इकाइयां स्थापित की व बैंक ब्याज दर 14%से घटा के 12% किया। उत्तर प्रदेश सहकारी समिति संशोधन कानून के जरिए सहकारिता के क्षेत्र में लोकतांत्रिक स्वरूप प्रदान किया । जब उलट फेर के बाद 28 फरवरी 1979 को बनारसी दास मुख्यमंत्री बने तब पुनः नेताजी को सहकारिता विभाग का मंत्री बनाया गया जो कि उनके पूर्ववर्ती कार्यों का प्रशस्ति पत्र था। नेताजी ने सहकारिता के क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं समाज के कमजोर तबके के लोगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की। सहकारिता के जरिए सामाजिक तनाव को दूर करने का सफल प्रयोग किया ।
सन् 1989 में जब नेताजी पहली बार मुख्यमंत्री बने तो कुर्सी संभालते ही वयोबृद्ध पत्रकारों को ₹5000 व 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके लेखकों, कवियों ,शायरों ,नृत्यको, संगीतज्ञो , चित्रकारों तथा मूर्तिकारों को जो अपने-अपने क्षेत्र में स्थापित हो चुकने के बाद बेसहारा हो गए थे, को 250 रुपए मासिक पेंशन प्रदान किया और 60 वर्ष से ऊपर हुए उपरोक्त लोगों को वार्षिक पेंशन व राजकीय चिकित्सालय में निःशुल्क चिकित्सा की सुविधा मुहैया कराई ।
इसी तरह नेताजी का हिंदी भाषा की प्रति लगाव जग जाहिर है क्योंकि वह डॉक्टर लोहिया के शिष्य थे इसलिए उनके अंदर हिंदी के प्रति लगाव होना लाजमी था । मुलायम सिंह यादव का मत था कि अंग्रेजी भाषा साम्राज्यवाद का प्रतीक है इसीलिए मुख्यमंत्री बनते ही मुलायम सरकार ने सरकारी कामकाज में अंग्रेजी के प्रयोग को पूरी तरह बंद करके हिंदी को हर स्तर पर अनिवार्य कर दिया । इसी क्रम में 1990 में प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में अंग्रेजी प्रश्न पत्र की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी । ( 06 जून 1990 एन0बी0टी0 समाचार पत्र में प्रकाशित) । हिंदी के प्रति लगाव का अनूठा उदाहरण इससे अच्छा क्या हो सकता है कि पूर्व राष्ट्रपति व महान वैज्ञानिक स्वर्गीय ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम के प्रेस सेक्रेटरी एस0एम0 खान ने उनकी पुस्तक “पीपुल्स प्रेसिडेंट: अब्दुल कलाम” के हवाले से कहा- हिंदी सीखने के लिए मुलायम सिंह यादव जी को डा0 कलाम साहब ने अपना गुरु स्वीकारा है । जब नेताजी प्रथम बार मुख्यमंत्री बने तो जिस तरीके से कामकाज की शुरुआत की उससे यही लग रहा था कि लंबे अरसे के बाद उत्तर प्रदेश को एक ऐसा काबिल मुख्यमंत्री मिला, जो केंद्र के इशारे पर न नाच कर और गद्दी की चिंता से मुक्त होकर तेजी से काम करने पर भरोसा करता है और बड़े से बड़े प्रशासनिक फैसले लेने का दम भी रखता है ।
नेताजी नाम के मुलायम लेकिन निर्णय लेने में बिल्कुल विपरीत-कठोर । कभी-कभी इतना कठोर निर्णय ले लेते थे कि फिर चाहे उनकी राजनीतिक कुर्सी ही क्यों न चली जाए। वर्ष 1990 में मुलायम सिंह ने उन लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जो सांप्रदायिक उन्माद फैलाने का प्रयास कर रहे थे और संवैधानिक लोकतांत्रिक तथा कानूनी कार्यकलापों की अवहेलना कर रहे थे । इसी क्रम में द्वारिका के शंकराचार्य द्वारा अयोध्या में पुनः शिलान्यास करने के मामले में कठोरता से पेश आकर श्री यादव ने यह सिद्ध कर दिया कि उनके शब्द खोखले नहीं होते और 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कार सेवकों पर कानून व्यवस्था बनाए रखने व न्यायालय के आदेश का पालन करने के क्रम में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा न्यूनतम बल प्रयोग करते हुए गोली चलवाने पर श्री यादव ने अफसोस जाहिर किया, लेकिन उन्होने कहा उस समय मेरे सामने मंदिर , मस्जिद नहीं एवं बल्कि देश की एकता व अखण्डता का सवाल था, देश की एकता व अखण्डता के लिए मुझे गोली चलवानी पड़ी। हालांकि इसका मुझे अफसोस है लेकिन मेरे सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं था। नेताजी ने कहा की कठोर निर्णय लेकर चोटिल अंगुली का सफल इलाज करना बहुत जरूरी है क्योंकि समय पर इसका इलाज नही किया गया तो इससे पूरे शरीर में सड़़न पैदा हो सकती है ।
नेताजी ने गरीब ,मजलूम, मजदूर और किसानों के लिए तमाम कार्य किये और अपने मुख्यमंत्रित्व काल में किसानों का कृषि संबंधी कर्ज ₹10000 तक माफ किया और मजदूरों के लिए दिहाड़ी की न्यूनतम मानदेय में संशोधन के साथ-साथ गन्ने की कीमतों में भी बढ़ोतरी की। 04 दिसंबर, 1994 को नेताजी दोबारा मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने लखनऊ के के0 डी0 सिंह बाबू स्टेडियम में शपथ ग्रहण की इस बार मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा दबे, कुचले, दलितों व अल्पसंख्यक वर्गों का ही प्रतिनिधित्व था। विद्यार्थी ही देश का भविष्य है इस बात को चरित्रार्थ करते हुए नेताजी ने पूर्ववर्ती सरकार द्वारा आरोपित नकल विरोधी अध्यादेश रद्द किया क्योंकि इस अध्यादेश की आड़़ में नवयुवकों को बेवजह कानून के खूनी शिकंजे व मुकदमों में फसाया जा रहा था उन्हें सामाजिक बराबरी के अवसर से विमुख किया जा रहा था। नेताजी ने कहा हम डॉक्टर लोहिया के अनुयायी है, अकारण किसी को परेशान करना हमारी नीति नहीं है। नेताजी का महिलाओं की सामाजिक उत्थान की प्रति योगदान था, उन्होंने महिलाओं की सामाजिक स्थिति व जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम की महिला सफाई कर्मचारियों के कार्य स्थल आने के समय में परिवर्तन करते हुए सुबह 06:00 बजे से 08:30 बजे कर दिया और कहा कि वह भी किसी की मां , बहन और बेटी है उनका भी परिवार है और परिवार का आधार घर की स्त्री होती है, किसी भी जालिम सरकार को यह हक नहीं है कि वह गरीब मजलूम महिलाओं को उनके सम्मानपूर्वक जीवन जीने से वंचित रख सके ।
किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पहली बार खलिहान दुर्घटना बीमा योजना शुरू की गई और निजी ट्यूबवेल के बिजली के बकाया बिल का अधिभार भी खत्म किया गया । किसानों के लिए किसान पेंशन योजना चालू की जिसमें 60 साल से ऊपर जिन किसानों के पास ढाई एकड़ से कम जमीन थी उन्हें 125 रुपए प्रतिमाह दिए जाने का प्रावधान किया। यह योजना इतनी प्रासंगिक थी कि आज की वर्तमान प्रदेश सरकार भी इसको लागू कर रखा है। यह माननीय नेताजी की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि उनके द्वारा शुरू की गई योजनाएं इतनी महत्वपूर्ण थी कि आज भी किसी भी अन्य सरकार के द्वारा स्वीकारने में कोई दुविधा नहीं होती है ।
एक ग्रामीण किसान परिवार में नेताजी का जन्म हुआ जहां वे पहलवानी से शिक्षक तथा शिक्षक से राजनेता और राजनीति के लगभग सभी विधाओं में अपने आप को अव्वल साबित करने में सफल रहे। समाज में सभी को बराबरी का हक मिले इसके लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने में भी नेताजी कभी पीछे नहीं रहे। नेताजी के द्वारा समाज में स्थापित किए गए तमाम ऐसे कीर्तिमान है जिनसे हमें आज भी प्रेरणा मिलती है। नेताजी के द्वारा किए गए कार्यों से गरीब, गुरबा, मेहनतकश ,मजदूर, मजलूम , पिछड़े व दलित, अल्पसंख्यक तथा समाज के अंतिम पायदान पर रहने वाले हमेशा ही लाभान्वित रहे हैं जिसकी वजह से नेताजी सभी के दिलों में बसे रहेंगे ।
लेखक:–राधाकांत यादव
शोध छात्र: मुलायम – सिंह यादव का व्यक्तित्व एवं कृतित्व
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय
कानपुर