मऊगंज/भोपाल। मध्य प्रदेश के मऊगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रदीप पटेल के पिछले 30 दिनों से सार्वजनिक पटल से गायब रहने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। 3 जनवरी को एक भूमि विवाद के दौरान हुए हंगामे के बाद से विधायक का अपने क्षेत्र में न दिखना कई सवाल खड़े कर रहा है।
प्रमुख घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति:
विवाद की पृष्ठभूमि: मामला 3 जनवरी को तब शुरू हुआ जब विधायक एक विवादित जमीन को लेकर धरने पर बैठे थे। वहां हुए हिंसक विरोध के बाद पुलिस ने उन्हें रेस्क्यू किया था, जिसके बाद से वे रहस्यमय तरीके से क्षेत्र से अनुपस्थित हैं।
पार्टी का स्पष्टीकरण: भाजपा जिला नेतृत्व और रीवा सांसद ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि विधायक सुरक्षित हैं और वर्तमान में भोपाल में हैं। पार्टी इसे विधायक का निजी अवकाश या “विश्राम” बता रही है।
असुरक्षा का साया: विधायक द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पुराने संदेश और उनके करीबियों के अनुसार, वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे थे। उन्होंने अपने परिवार को भी घर के अंदर रहने की सलाह दी थी।
विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने इस “लापता” प्रकरण को मुद्दा बनाते हुए रीवा आईजी कार्यालय में ज्ञापन सौंपा है। विपक्ष का तर्क है कि यदि एक सत्ताधारी दल का विधायक सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा?
एक विधायक का एक महीने तक अपने निर्वाचित क्षेत्र से दूर रहना न केवल प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित करता है, बल्कि यह क्षेत्र में “लीडरशिप वैक्यूम” (नेतृत्व का अभाव) भी पैदा करता है। हालांकि पुलिस और पार्टी उनके भोपाल में होने का दावा कर रही है, लेकिन विधायक की ओर से कोई सीधा सार्वजनिक बयान न आना इस सस्पेंस को और गहरा कर रहा है।