नई दिल्ली | संसद के गलियारों में इस वक्त सबसे बड़ी सुगबुगाहट किसी कानून को लेकर नहीं, बल्कि सदन के ‘अंपायर’ यानी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेकर है। विपक्ष और सरकार के बीच तल्खी इस कदर बढ़ चुकी है कि अब चर्चा ‘अविश्वास’ से आगे बढ़कर ‘हटाने के संकल्प’ (Resolution for Removal) तक जा पहुंची है।
अटकलें या हकीकत?
तकनीकी रूप से अविश्वास प्रस्ताव केवल सरकार पर आता है, लेकिन स्पीकर के खिलाफ अनुच्छेद 94 के तहत संकल्प लाने की तैयारी की खबरें हवा में हैं। विपक्ष का आरोप सीधा है— ‘माइक बंद किया जा रहा है और विपक्ष की आवाज़ दबाई जा रही है।’ उधर, सत्ता पक्ष इसे सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश बता रहा है।
सियासी शतरंज की चाल:
क्या विपक्ष के पास नंबर गेम है? शायद नहीं। लेकिन यह लड़ाई आंकड़ों से ज्यादा ‘परसेप्शन’ (नरेटिव) की है। 14 दिन का नोटिस और प्रभावी बहुमत की शर्त के बीच, विपक्ष इस संकल्प के जरिए देश को यह संदेश देना चाहता है कि लोकतंत्र के मंदिर में अब संतुलन बिगड़ चुका है।
बड़ी बात:
इतिहास गवाह है कि स्पीकर को हटाना आसान नहीं रहा, लेकिन अगर यह संकल्प पेश होता है, तो यह 2026 की सबसे बड़ी राजनीतिक बिसात होगी। क्या यह केवल दबाव बनाने की रणनीति है या विपक्ष वाकई आर-पार के मूड में है? नजरें अब अगले 14 दिनों के घटनाक्रम पर टिकी हैं।