भोपाल | विशेष संवाददाता
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर नाबालिग की अस्मत से खिलवाड़ और रक्षक के ही ‘भक्षक’ की भूमिका में आने से दहल उठी है। अयोध्या नगर इलाके में एक नाबालिग छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म के मामले ने अब वह मोड़ ले लिया है, जहाँ सवाल सिर्फ एक अपराधी की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि पुलिस महकमे के भीतर मौजूद उस ‘सड़े हुए तंत्र’ का है जिसने अपराध को ऑक्सीजन दी।
सिस्टम की साख पर बट्टा
इस मामले की सबसे वीभत्स परत तब खुली जब जांच में एक पुलिस हवलदार का नाम सामने आया। यह महज इत्तेफाक नहीं था कि आरोपी माज पुलिस की गिरफ्त से दूर भागता रहा; उसे वर्दी का संरक्षण प्राप्त था। हवलदार का निलंबन इस बात की तस्दीक करता है कि माज जैसे अपराधियों के हौसले बुलंद करने में विभाग की काली भेड़ें शामिल हैं। एक तरफ जहां सरकार ‘बेटी बचाओ’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कानून के रखवालों द्वारा ही अपराध को ढंकने की कोशिश ने वर्दी की निष्पक्षता को अग्निपरीक्षा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
जिम बना अपराध का अड्डा
आरोपी माज, जो एक जिम का संचालक है, पर आरोप है कि उसने नाबालिग को प्रेम जाल और फिर ब्लैकमेलिंग के जरिए अपनी हवस का शिकार बनाया। स्थानीय स्तर पर इसे ‘लव जिहाद’ के एंगल से देखा जा रहा है, जिससे शहर का सांप्रदायिक सौहार्द भी दांव पर है। हिंदूवादी संगठनों के बढ़ते दबाव और सड़कों पर उतरे आक्रोश के बाद ही पुलिस कुंभकर्णी नींद से जागी और गिरफ्तारी की औपचारिकता पूरी की गई।
प्रशासन का ‘कड़ा प्रहार’
ताजा अपडेट के मुताबिक, मामला अब केवल FIR तक सीमित नहीं रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग के सख्त रुख के बाद आरोपी की अवैध संपत्तियों और उसके द्वारा संचालित जिम के दस्तावेजों की छानबीन शुरू हो चुकी है। संकेत साफ हैं—कानून का बुलडोजर आरोपी के अहंकार को कुचलने की तैयारी में है।
> यह घटना इस कड़वी हकीकत को उजागर करती है कि जब तक थानों में बैठे ‘संरक्षणदाताओं’ का इलाज नहीं होगा, तब तक शहर की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं होंगी। निलंबन काफी नहीं है, जरूरत एक नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की है।