इंदौर।
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद अब प्रशासन ने मामले को केवल स्वास्थ्य आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही के रूप में लेना शुरू कर दिया है। ताज़ा अपडेट के मुताबिक, पानी की प्राथमिक जांच रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से सुधारात्मक कार्रवाई तेज कर दी है।
जांच में क्या सामने आया
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि
• सीवरेज लाइन का गंदा पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल रहा था
• पुरानी और जर्जर पाइपलाइन से लंबे समय से रिसाव हो रहा था
• शिकायतों के बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं की गई
इसी आधार पर अब पूरे इलाके में पेयजल नेटवर्क को आंशिक नहीं, बल्कि सेक्शन-वाइज बदलने का निर्णय लिया गया है।
अब तक की ठोस कार्रवाई
✔ प्रभावित इलाके में पुरानी पाइपलाइन हटाने का काम शुरू
✔ सभी टंकियों, बोरवेल और जलस्रोतों का दोबारा क्लोरीनेशन
✔ जलापूर्ति को सीधे सप्लाई की बजाय टैंकर आधारित अस्थायी व्यवस्था से जोड़ा गया
✔ स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्वे पूरा, संदिग्ध मरीजों की अलग सूची तैयार
✔ मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए मुआवजा वितरण लगभग पूरा
जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार,
• नगर निगम के जलकार्य विभाग से स्पष्टीकरण तलब किया गया है
• लापरवाही पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई और निलंबन की तैयारी
• पूरे शहर में पेयजल लाइनों का ऑडिट कराने का निर्णय
अब आगे क्या होगा
🔹 विस्तृत लैब रिपोर्ट के आधार पर फाइनल जांच रिपोर्ट
🔹 दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय
🔹 संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी जलशुद्धिकरण व्यवस्था
🔹 भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू
प्रशासन का दावा
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, नए गंभीर मरीज सामने नहीं आए हैं, लेकिन पूरी तरह संतोषजनक हालात बनने तक निगरानी जारी रहेगी।