ग्वालियर। शहर के व्यापारियों की शीर्ष संस्था, मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने आज ग्वालियर नगर निगम आयुक्त से मुलाकात कर शहर की ज्वलंत समस्याओं को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। चैंबर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि गार्बेज शुल्क और शहर की खुदी पड़ी सड़कों का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो व्यापारियों में गहरा असंतोष पनपेगा।
मुख्य मांगें और मुद्दे:
1. गार्बेज शुल्क: “निर्णय परिषद का, पर लागू क्यों नहीं?”
चैंबर ने कहा कि 29 दिसंबर 2025 को नगर निगम परिषद की बैठक में गार्बेज शुल्क की दरों को युक्तियुक्त करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है। विसंगतियों के कारण व्यापारी अपना संपत्ति कर (Property Tax) जमा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे निगम को भी राजस्व का घाटा हो रहा है। मांग की गई है कि जब तक नई दरें लागू न हों, संपत्ति कर को बिना गार्बेज शुल्क के जमा करने की अनुमति दी जाए।
2. स्मार्ट सिटी के हृदय स्थल की दुर्दशा (पाटनकर बाजार से बाड़ा)
ज्ञापन में बताया गया कि महाराज बाड़ा जाने वाला मुख्य मार्ग (पाटनकर बाजार से दौलतगंज) पिछले 6 महीने से खुदा पड़ा है। कायाकल्प योजना में स्वीकृत होने के बावजूद काम अधूरा है, जिससे पर्यटकों के सामने ग्वालियर की छवि धूमिल हो रही है और व्यापारियों का व्यापार ठप है। चैंबर ने इसे अधिकारियों की घोर लापरवाही बताते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
3. पार्किंग का पानी और ऐतिहासिक इमारतों को खतरा
महाराज बाड़ा पर निर्माणाधीन पार्किंग से रात के समय लाखों लीटर पानी छोड़ा जा रहा है, जो दौलतगंज और माधौगंज की ओर बह रहा है। व्यापारियों ने चिंता जताई है कि यह पानी पुरानी इमारतों की नींव में जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती है। सुझाव दिया गया कि इस पानी को सहेजकर बैजाताल या कटोरा ताल में डाला जाए।
4. अन्य प्रमुख समस्याएं:
* डीडवाना ओली: मृगनयनी शोरूम से गस्त के ताजिया तक पानी की लाइन के लिए खुदी सड़क को तुरंत दुरुस्त करने की मांग।
* लक्कड़खाना पुल: पुल का चौड़ीकरण कार्य अचानक बंद होने पर स्पष्टीकरण मांगा गया।
* स्ट्रीट लाइट: शहर में दिन में लाइटें जलने और रात में अंधेरा रहने की अव्यवस्था पर नाराजगी।
* विक्की फैक्ट्री और चेतकपुरी मार्ग: अधर में लटके रोड निर्माण कार्य को समय सीमा में पूरा करने का आग्रह।
चैंबर का पक्ष: “व्यापारी टैक्स देना चाहता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उसे धूल और खुदी हुई सड़कें मिल रही हैं। निगम प्रशासन को अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना होगा।”