उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट कुल 09 लाख 12 हजार 696 करोड़ में से शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए कुल बजट का 12.4 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा के लिए आवंटित किया है। प्रदेश में बुनियादी शिक्षा को सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा विभाग के लिए कुल ₹77,622 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
प्रदेश के विद्यालयों को स्मार्ट एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने के लिए ₹300 करोड़ की विशेष व्यवस्था की गई है। इस राशि से विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल उपकरण, आधुनिक शिक्षण संसाधन तथा आधारभूत संरचना का विकास किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को तकनीक आधारित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके।
शिक्षकों के कल्याण हेतु ₹358 करोड़ की धनराशि कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए निर्धारित की गई है। इससे प्रदेश के शिक्षकों एवं उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी और उनका मनोबल सुदृढ़ होगा।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक जनपद में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल विद्यालयों की स्थापना की जाएगी, जिनमें आधुनिक सुविधाएं एवं उच्च गुणवत्ता की शैक्षिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में एक-एक विद्यालय का निर्माण किया जाएगा जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन एवं संसाधन उपलब्ध हो सकें।
हालांकि शिक्षा क्षेत्र में किए गए ये प्रावधान स्वागतयोग्य हैं, किन्तु प्रदेश के लाखों शिक्षकों एवं कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पुरानी पेंशन योजना की बहाली पर इस बजट में कोई घोषणा न किया जाना निराशाजनक है कर्मचारियों को आशा थी कि सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर सकारात्मक निर्णय लेगी। पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा आज भी कर्मचारियों के लिए अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बना हुआ है।