अरविंद कुमार वर्मा
त्रिवेदीगंज, बाराबंकी। पशु चिकित्सालय त्रिवेदीगंज परिसर के निकट 13 जनवरी को बड़ी मात्रा में दवाएं जलाए जाने का मामला अखबारों नें विशेष रूप में प्रकाशित किया था। इस गंभीर प्रकरण पर जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने प्रकाशित समाचार का तत्काल संज्ञान लेते हुए एक जांच टीम का गठन किया।
जांच टीम में उपजिलाधिकारी अनिल कुमार सरोज, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सुरजीत सचान और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मंजुला देवी को नामित किया गया। टीम ने मौके का निरीक्षण किया और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। टीम के पहुंचने से पहले ही पशुपालक सिद्धार्थ अवस्थी ने अस्पताल के पीछे भारी मात्रा में फेंकी गई दवाएं बरामद करवाई थीं। जांच टीम ने किसान संजय वर्मा, राहुल वर्मा, शिव मोहन वर्मा और के लिखित बयान दर्ज किए।
जाँच टीम की सदस्य डॉ. मंजुला देवी ने बताया कि सभी पशुपालकों और कर्मचारियों के बयान लिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दवाओं की जिम्मेदारी फार्मासिस्ट की होती है, लेकिन मौके पर फार्मासिस्ट अवधेश शुक्ला मौजूद नहीं थे। दूरभाष के माध्यम से जब अवधेश शुक्ला जी से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि चाभी हमारे पास नहीं रहती है चाभी मैडम के पास रहती है दवा के बारे में ज्यादा हमें जानकारी नहीं है हमारी तैनाती लिखित रूप से हसवा पुर है त्रिवेदीगंज और कबूलपुर का मुझे अतिरिक्त चार्ज दिया गया है तीन जगह देखना रहता है इसलिए ज्यादा कुछ बता नहीं सकते।
जांच के दौरान पशु चिकित्साधिकारी डॉ. इंदूबाला के पति की अस्पताल में मौजूदगी एवं सक्रियता पर ग्राम तेजवापुर के प्रधान संजय वर्मा भड़क गए। उन्होंने सवाल किया कि वे जांच के दौरान उपस्थित रहकर क्या कर रहे हैं, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ। प्रधान संजय वर्मा ने आरोप लगाया कि डॉक्टर गांव में जाकर इलाज नहीं करती हैं और अस्पताल आने वाले पशुपालकों से दवाओं के पैसे लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पशुपालकों को दवाएं न देकर उन्हें लगातार जलाया जा रहा है।
उपजिलाधिकारी के निर्देशन में मौके पर पहुंचे लेखपाल स्वयंवीर सिंह ने भी ग्रामीणों के बयान दर्ज किए। कुछ ग्रामीणों ने टीकाकरण न होने की शिकायत भी की।
जांच टीम ने अपनी पड़ताल पूरी कर ली है और रिपोर्ट जल्द ही जिलाधिकारी बाराबंकी को सौंप दी जाएगी।
(अनिल कुमार सरोज)
उपजिलाधिकारी