ग्वालियर शहर का प्रमुख और व्यस्ततम क्षेत्र, सराफा बाजार लश्कर, एक बार फिर प्रशासन और पुलिस की सख्ती के बावजूद जाम की समस्या से जूझ रहा है। जहां एक ओर शासन और प्रशासन सड़कों को सुगम बनाने और जाम की समस्या को हल करने के लिए लगातार प्रयासों की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर यह स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
बार-बार की कोशिशों के बावजूद सराफा बाजार में जाम की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। विशेष रूप से शाम के समय यह समस्या चरम पर पहुंच जाती है, जिससे बाजार में दुकानदारों, खरीददारों और यात्रीगणों के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। सड़क किनारे अतिक्रमण, पार्किंग की अव्यवस्था और अनियंत्रित यातायात इसकी मुख्य वजहें बताई जा रही हैं।
हालांकि पुलिस और प्रशासन ने कई बार कार्रवाई करने की कोशिश की, लेकिन इन प्रयासों का असर ज्यादा दिन तक नहीं टिकता। सवाल यह उठता है कि आखिर किसके इशारे पर यह गोरख धंधा चलता है और क्यों प्रशासन के तमाम प्रयास यहाँ पूरी तरह से नाकाम हो जाते हैं? क्या यह सारा मामला किसी साठ-गांठ का नतीजा है या फिर प्रशासन की नाकामी का परिणाम?
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का कहना है कि यहां अतिक्रमण और ट्रैफिक के चलते जाम की स्थिति बनती है, लेकिन जब प्रशासन की निगाहें और पुलिस का नियंत्रण इन सड़कों पर नहीं टिकता, तो ऐसा लगता है कि यह सब किसी बड़े इशारे पर हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर अब इलाके में चर्चा तेज हो गई है और लोग प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
क्या यह मामला सख्त नियमन और निगरानी की ओर इशारा करता है, या फिर कहीं न कहीं यह सभी प्रयास सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाते हैं? अब देखना होगा कि ग्वालियर प्रशासन और पुलिस इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।