भोपाल |
मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि वक्फ बोर्ड की 185 से अधिक संपत्तियों को नियमों को दरकिनार कर बेहद कम किराए पर दिया गया, जिससे बोर्ड को लगभग 2.54 करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसी के अनुसार, जिन संपत्तियों से प्रतिवर्ष करीब 2.76 करोड़ रुपये का किराया मिलना चाहिए था, उनसे वास्तव में सिर्फ लगभग 21 लाख रुपये सालाना ही वसूले गए। यह अंतर अपने आप में वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा मामला वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ संपत्ति पट्टा नियम 2014 के स्पष्ट उल्लंघन से जुड़ा है। नियमों के अनुसार न तो उचित मूल्यांकन किया गया और न ही पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई। आरोप है कि पूर्व पदाधिकारियों और जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने दायित्वों की अनदेखी करते हुए संपत्तियों को मनमाने ढंग से किराए पर दे दिया।
EOW ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि यह निर्णय किन स्तरों पर लिया गया, इसमें कौन-कौन जिम्मेदार रहा और क्या इसके पीछे किसी प्रकार का व्यक्तिगत लाभ या सांठगांठ थी।
वक्फ बोर्ड की संपत्तियां सामाजिक और धार्मिक उद्देश्यों के लिए होती हैं। ऐसे में करोड़ों के नुकसान का यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि सार्वजनिक हित के साथ विश्वासघात के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के दायरे के और विस्तृत होने तथा जिम्मेदार चेहरों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।